‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’: आधी रात को इश्क करने पहुंचे प्रेमी को ग्रामीणों ने घेरा, प्रेमिका ने रचाया ‘मास्टरमाइंड’ विवाह
बिहार : मशहूर शायर राहत इंदौरी साहब दुनिया को एक बड़ा सबक सिखाकर गए थे कि "बुलाती है मगर जाने का नहीं..." लेकिन बिहार के एक आशिक मिजाज नौजवान ने इस चेतावनी को महज शायरी समझकर अनदेखा कर दिया। नतीजा यह हुआ कि जनाब आधी रात को चुपके से अपनी लैला से मिलने पहुंचे थे, और सुबह का सूरज निकलने से पहले उनके सिर पर दूल्हे का सेहरा सज चुका था।
खेतों में हुई 'रोमियो' की घेराबंदी
घटना के मुताबिक, प्रेमिका के परिजनों की सख्त चेतावनियों को दरकिनार करते हुए प्रेमी का दिल नहीं माना। आधी रात को जैसे ही महबूबा का बुलावा आया, जनाब सारे खतरे मोल लेकर प्रेमिका के घर की चौखट लांघने पहुंच गए।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। परिजन पहले से ताक में बैठे थे और उन्होंने आशिक को रंगे हाथों धर दबोचा। खुद को घिरता देख नौजवान ने किसी पेशेवर धावक की तरह सरपट दौड़ लगाई, पर सतर्क ग्रामीणों ने खेतों के बीच नाकेबंदी कर उसे चारों तरफ से घेर लिया।
प्रेमिका का ‘मास्टर प्लान’ और फिल्मी ड्रामा
कहानी में असली मोड़ तब आया जब प्रेमी को लगा कि अब उसकी धुनाई निश्चित है। तभी प्रेमिका दौड़ती हुई आई और सबके सामने प्रेमी से लिपट गई। रोने-धोने के नाटकीय अंदाज में उसने साफ ऐलान कर दिया— "शादी होगी तो बस इसी से!"
दरअसल, यह सब प्रेमिका का रचा हुआ एक सोचा-समझा 'मास्टर प्लान' था, ताकि परिजनों और ग्रामीणों के दबाव में आशिक के साथ कानूनी व सामाजिक तौर पर शादी पक्की की जा सके।
रोता रहा दूल्हा, हंसती रही दुल्हन
घटना के बाद आधी रात को ही गांव में मंडप सजा दिया गया। एक तरफ जहां प्रेमिका अपने 'प्लान' की सफलता से बेहद खुश नजर आ रही थी, वहीं बेचारा नया-नया बना दूल्हा आंखों में आंसू लिए अपनी किस्मत पर रो रहा था।
इसी बीच दुल्हन ने बेहद मासूमियत से एक और सवाल दागा— "शादी के बाद तुम्हारे घरवाले मुझे मारेंगे तो नहीं?" जिस पर रोते-बिलखते दूल्हे ने सिर हिलाकर हामी भरी कि 'कोई कुछ नहीं कहेगा'।
आखिरकार, भारी मन और बहते आंसुओं के साथ शादी संपन्न हुई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हर बुलावा सिर्फ प्यार का पैगाम नहीं होता, कभी-कभी वह 'शादी का 24 कैरेट ट्रैप' भी हो सकता है।

