मानगढ़ धाम में गूंजी 'भील प्रदेश' की मांग: महासम्मेलन में उमड़ा आदिवासियों का जनसैलाब, प्रशासन मुस्तैद
बांसवाड़ा/राजस्थान।। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं को जोड़ने वाले ऐतिहासिक मानगढ़ धाम में रविवार को एक बार फिर इतिहास दोहराया गया। भील प्रदेश संदेश यात्रा एवं महासम्मेलन के तहत आज सुबह से ही हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग मानगढ़ धाम पहुंचे। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र 'भील प्रदेश' के नारों और पारंपरिक जयकारों से गूंज उठा और चारों तरफ एक विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा का आह्वान
महासम्मेलन के दौरान भील प्रदेश मोर्चा के विभिन्न प्रतिनिधियों ने मंच से अलग भील प्रदेश राज्य की मांग को पूरी प्रखरता से उठाया। वक्ताओं ने राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों में जनता को संबोधित किया। उन्होंने आदिवासी इतिहास, गौरवशाली संस्कृति और सामाजिक एकता पर जोर देते हुए "जल, जंगल और जमीन" की रक्षा के लिए सभी को एकजुट रहने का आह्वान किया।
उपेक्षा के लगे आरोप, अलग राज्य को बताया समाधान
मंच से बोलते हुए कई नेताओं और वक्ताओं ने सरकारों पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि:
लंबे समय से आदिवासी समाज की उपेक्षा की जा रही है और उन्हें विकास की मुख्यधारा से दूर रखा गया है।
वर्तमान सरकार पर भी आदिवासियों के अधिकारों और हितों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए गए।
वक्ताओं ने पुरजोर तरीके से दावा किया कि एक अलग 'भील प्रदेश' बनने से ही इस आदिवासी बहुल क्षेत्र को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर समाज की समस्याओं का सही और त्वरित समाधान हो सकेगा।
प्रमुख धर्मगुरु भंवरलाल परमार की शिरकत, बढ़ा उत्साह
आदिवासी समाज के प्रमुख धर्मगुरु और प्रख्यात विचारक भंवरलाल परमार जैसे ही महासम्मेलन में पहुंचे, पूरा पंडाल उनके स्वागत में झूम उठा। उनके मंच पर आते ही लोगों का उत्साह दोगुना हो गया। सम्मेलन में मौजूद हर कोई उनके विचारों और मार्गदर्शन को सुनने के लिए बेहद उत्सुक नजर आया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हजारों की भारी भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। मानगढ़ धाम और वहां जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर जगह-जगह मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी। चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही।
ख़बर लिखे जाने तक सम्मेलन में लोगों के आने का सिलसिला लगातार जारी था और आगामी सत्रों के लिए कई अन्य प्रमुख वक्ताओं का संबोधन होना बाकी था।


