राजस्थान पंचायत चुनाव से पहले बड़ा फैसला: 'दो से अधिक संतान' वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव, अयोग्यता खत्म!
जयपुर/राजस्थान।। राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों से ठीक पहले भजनलाल सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कानूनी बदलाव किया है। सूबे में अब दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी भी व्यक्ति को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। सरकार के इस कदम से ग्रामीण राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हजारों दावेदारों को सीधा फायदा मिलेगा।
कानून में क्या हुआ बदलाव?
राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 19 में बड़ा संशोधन किया है। इसके तहत चुनाव लड़ने के लिए सालों से लागू 'संतान संबंधी कड़े प्रावधान' को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
क्या था पुराना नियम?
पहले के नियम के मुताबिक, अगर किसी उम्मीदवार के 27 नवंबर 1995 के बाद दो से अधिक बच्चे होते थे, तो वह पंचायत राज (सरपंच, पंच, जिला परिषद या प्रधान) का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। अब इस पाबंदी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है।
इस फैसले के मायने और बड़े असर:
हजारों दावेदारों को संजीवनी: इस नियम की वजह से जो जमीनी नेता सालों से योग्यता होने के बावजूद चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे, उनके लिए अब राजनीति के दरवाजे खुल गए हैं।
मुकदमों से राहत: पंचायत चुनावों में अक्सर प्रतिद्वंद्वी एक-दूसरे के बच्चों की संख्या को लेकर कोर्ट-कचहरी और निर्वाचन आयोग में शिकायतें करते थे। अब यह विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
चुनावी समीकरण बदलेंगे: इस फैसले के बाद गांवों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी, जिससे आने वाले पंचायत चुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मुकाबले वाले होने की उम्मीद है।
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व करना चाहते थे, लेकिन इस तकनीकी नियम की वजह से पीछे रह जाते थे।

