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दो सगी बहनों का कमाल: RPSC सहायक आचार्य भर्ती में अनुपमा को 14वीं और प्रेमलता को 36वीं रैंक, पूरे प्रदेश में चर्चा
बांसवाड़ा / सीकर : बांसवाड़ा के तिरुपति नगर की रहने वाली दो सगी बहनों ने कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (संस्कृत) भर्ती परीक्षा-2023 के जारी परिणामों में बड़ी बहन प्रेमलता पाठक ने पूरे प्रदेश में 36वीं रैंक और छोटी बहन अनुपमा पाठक ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 14वीं रैंक हासिल की है। एक ही घर से दो बहनों का एक साथ उच्च शिक्षा में चयन होना परिवार, समाज और पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व का विषय बन गया है।
प्रेमलता पाठक की 5वीं सरकारी नौकरी: संघर्ष से सफलता का अनुठा सफर
वर्तमान में बांसवाड़ा के राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय में प्राध्यापिका (स्कूल व्याख्याता) के रूप में सेवारत प्रेमलता पाठक की सफलता की यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। सहायक आचार्य के पद पर उनका यह चयन पाँचवीं सरकारी सेवा है।
उनका यह सफरनामा कुछ इस प्रकार रहा:
2017: तृतीय श्रेणी अध्यापक
2018: संस्कृत शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी अध्यापक
2018: द्वितीय श्रेणी अध्यापक
2021: प्राध्यापिका (स्कूल व्याख्याता)
2026: RPSC सहायक आचार्य (36वीं रैंक)
शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान, नवाचार और समर्पण के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस 2025 पर बांसवाड़ा जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
छोटी बहन अनुपमा भी नहीं हैं पीछे
सफलता की इस दौड़ में छोटी बहन अनुपमा पाठक ने भी अपना लोहा मनवाया है। अनुपमा वर्तमान में सीकर जिले में द्वितीय श्रेणी अध्यापिका के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं और अब वे भी अपनी बहन के साथ कॉलेज शिक्षा में सहायक आचार्य के रूप में नई जिम्मेदारियाँ संभालेंगी।
सीकर के मरडाटू बड़ी गाँव से है मूल संबंध
मूल रूप से सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के ग्राम मरडाटू बड़ी निवासी इस परिवार में आज उत्सव का माहौल है। प्रेमलता पाठक (पत्नी विजय शर्मा) और अनुपमा पाठक ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय ईश्वर की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के सटीक मार्गदर्शन और परिवार के अटूट सहयोग को दिया है।
दोनों बहनों की यह दोहरी सफलता प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए एक जीवंत मिसाल है कि यदि सोच सकारात्मक हो और मेहनत निरंतर, तो कोई भी मुकाम असंभव नहीं है। इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने हर्ष जताते हुए दोनों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं।


