झाबुआ। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद में 12 सितंबर 2015 की वो काली सुबह आज भी लोगों के जेहन में खौफ और दर्द बनकर जिंदा है। कल इस भीषण बम ब्लास्ट की 11वीं बरसी है, लेकिन हादसों की मार झेल चुके पीड़ित परिवार आज भी न्याय और वादों के पूरे होने की आस लगाए बैठे हैं।
तबाही का वो मंजर: 89 जिंदगियां और 200 फीट दूर तक बिखरे चिथड़े
12 सितंबर 2015 की सुबह 8:25 बजे पेटलावद नगर के बस स्टैंड पर राजेंद्र कासवा के गोदाम से अचानक धुआं उठता देखा गया था। मानवता का परिचय देते हुए आसपास के लोग आग बुझाने के लिए दौड़े और जैसे ही दुकान का शटर खोला, गोदाम में अवैध रूप से रखी जिलेटिन की छड़ों और डेटोनेटर में एक भीषण धमाका हो गया।
धमाका इतना खौफनाक था कि पलक झपकते ही पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो गई। इस भीषण हादसे में लगभग 89 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंसानी अंगों के चिथड़े 150 से 200 फीट दूर तक जा गिरे थे।
11 साल बाद भी अधूरा वादा: न बना स्मारक, न मिला न्याय
अधूरी घोषणाएं: हादसे के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेटलावद में 3 दिनों तक रहकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। प्रशासन ने मृतकों की याद में एक भव्य श्रद्धांजलि स्मारक बनाने का वादा किया था, जो 11 साल बीत जाने के बाद भी नहीं बन सका।
एसआईटी जांच बेनतीजा: हादसे की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) जांच गठित की गई थी। लेकिन 89 बेगुनाह लोगों की जान जाने के बावजूद आज तक किसी भी दोषी को कड़ी सजा नहीं मिल सकी है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आज भी इंसाफ की गुहार लगा रहे परिजन
इस त्रासदी में कई मासूमों ने अपने माता-पिता को खोया, तो किसी का पूरा परिवार ही बिखर गया। पीड़ित परिजन और पेटलावद नगरवासी 12 सितंबर को दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और सरकार व प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग दोहराएंगे।

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