झाबुआ पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता की मिसाल: 1 घंटे में 7 वर्षीय मासूम को खोजकर परिजनों से मिलाया
स्थान: झाबुआ (मध्यप्रदेश)
विशेष: रायपुरिया थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा, परिजनों ने जताया आभार
झाबुआ। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की रायपुरिया थाना पुलिस ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली, सजगता और मानवीय दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 7 वर्षीय मासूम बालक विजय गामड़ के लापता होने की खबर मिलते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए त्वरित सर्च ऑपरेशन चलाया और महज 60 मिनट के भीतर बालक को सकुशल खोज निकालकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर रायपुरिया थाना क्षेत्र के एक गांव से 7 वर्षीय विजय गामड़ अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। काफी देर तक खोजबीन करने के बाद भी जब बालक का कोई सुराग नहीं मिला, तो घबराए परिजन तुरंत रायपुरिया थाने पहुंचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी।
पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित सर्च ऑपरेशन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रायपुरिया थाना प्रभारी ने बिना एक पल गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया। परिजनों से बच्चे के हुलिए और कपड़ों की जानकारी लेकर पुलिस टीम ने:
गांव के मुख्य रास्तों और बाजार क्षेत्र में नाकेबंदी की।
आसपास के खेतों, कुओं, तालाबों और सुनसान इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया।
पुलिस की इस घेराबंदी और मुस्तैदी का ही परिणाम रहा कि सूचना मिलने के ठीक 1 घंटे के अंदर बालक को एक स्थान से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। बालक थोड़ा डरा हुआ था, जिस पर पुलिसकर्मियों ने उसे प्यार से संभाला, पानी पिलाया और सुरक्षित थाने लेकर आए।
भावुक क्षण: परिजनों की आंखों से छलके आंसू
थाने में अपने मासूम बच्चे को बिल्कुल सही-सलामत देखकर परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। मां ने रोते हुए अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगा लिया। परिजनों ने रायपुरिया पुलिस की इस त्वरित मदद के लिए बार-बार हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।
जनता में बढ़ा पुलिस के प्रति विश्वास
अक्सर बच्चों के गुमशुदगी के मामलों में थोड़ी सी भी देरी किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन जाती है। लेकिन रायपुरिया पुलिस की इस फुर्ती और संवेदनशीलता की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक परिवार की खुशियां लौटने से बचा लीं, जिससे आम जनता के बीच खाकी के प्रति सम्मान और विश्वास और मजबूत हुआ है।
"झाबुआ पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील दिल धड़कता है, जो संकट के समय आम जनमानस की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहता है।"

