स्वदेशी माइक्रो-टर्बोजेट इंजनों के लिए DheyaTech को मिली ₹43 करोड़ की फंडिंग

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भारत का स्वदेशी एयरोस्पेस इकोसिस्टम मजबूत: ₹43 करोड़ के निवेश से 'माइक्रो-टर्बोजेट' इंजन क्षेत्र को मिली बड़ी उड़ान

बेंगलुरु। भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर को 'आत्मनिर्भर' बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। बेंगलुरु बेस्ड डीप-टेक स्टार्टअप धेया इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज (DheyaTech) ने Avaana Capital की अगुवाई में ₹43 करोड़ की फंडिंग हासिल की है। इस राउंड में मौजूदा निवेशक अनिमेश एयरोस्पेस (Unimech Aerospace) ने भी हिस्सा लिया है।

DheyaTech Raising: Avaana Capital की अगुवाई में ₹43 करोड़ की फंडिंग, स्वदेशी 200N और 500N इंजनों का होगा निर्माण

इस फंडिंग का उपयोग स्वदेशी गैस टरबाइन और माइक्रो-टर्बोजेट इंजनों के उत्पादन को बढ़ाने, एकीकृत परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने और डिलीवरी में तेजी लाने के लिए किया जाएगा।

देशी इंजन, वैश्विक मांग: 200N और 500N श्रेणी में कमाल

धेया टेक्नोलॉजीज ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार 200N (DET 200) और 500N (DET 500) क्षमता वाले माइक्रो-टर्बोजेट इंजन विकसित किए हैं।

  • OEM ऑर्डर: कंपनी को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) से पक्के ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं, जो भारतीय स्वदेशी प्रोपल्शन (Propulsion) तकनीक की वैश्विक बाजार में बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।

  • फ्लाइट ट्रायल्स (Q4 2026): कंपनी का अगला सबसे अहम पड़ाव साल 2026 की चौथी तिमाही (Q4 2026) में होने वाले फ्लाइट ट्रायल्स हैं। इन ट्रायल्स से साबित होगा कि ये इंजन वास्तविक हवाई परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं।

  • प्रमाणन (Certification): धेयाटेक DRDO की संस्था CEMILAC (Centre for Military Airworthiness and Certification) से सैन्य हवाई योग्यता प्रमाणन हासिल करने की प्रक्रिया में है।

अनमैंड सिस्टम्स और एयरोस्पेस के लिए क्यों है अहम?

छोटे, हल्के और उच्च दक्षता वाले माइक्रो-टर्बोजेट इंजन modern aerospace technology की रीढ़ हैं।

  1. अनमैंड एरियल व्हीकल्स (UAVs & Drones): लंबी दूरी के सैन्य और असैन्य ड्रोन्स और एरियल प्लेटफॉर्म्स के लिए कॉम्पैक्ट प्रोपल्शन बेहद जरूरी होता है।

  2. हाई-स्पीड टारगेट ड्रोन्स: सैन्य अभ्यास और टेस्टिंग में उपयोग होने वाले ड्रोन्स में इन इंजनों का सीधा इस्तेमाल हो सकता है।

  3. कम वजन और ज्यादा थ्रस्ट: कम जगह घेरने और कम वजन होने के बावजूद ये इंजन उच्च गति और पावर देने में सक्षम हैं।

छोटे इंजनों से बड़ी महत्वाकांक्षाओं की ओर

दुनिया भर में केवल चुनिंदा देशों के पास ही गैस टरबाइन और टर्बोजेट इंजन डिजाइन व मैन्युफैक्चर करने की तकनीक मौजूद है। भारत अब तक ऐसे इंजनों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर रहा है।

धेयाटेक का यह कदम सिर्फ एक फंडिंग खबर नहीं है, बल्कि भारत के एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। छोटे इंजनों से शुरू हुआ यह सफर आने वाले समय में बड़े एयरोस्पेस मिशनों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

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