मंगल ग्रह से मिट्टी और चट्टानें लाने की तैयारी: चीन का महात्वाकांक्षी 'तियानवेन-3' मिशन
बीजिंग: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन एक और बड़ा इतिहास रचने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
दो अलग-अलग लॉन्च का अनोखा मॉडल
मंगल ग्रह तक पहुँचने और वापस लौटने की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तियानवेन-3 मिशन में दो अलग-अलग रॉकेट लॉन्च का इस्तेमाल किया जाएगा:
पहला हिस्सा (लैंडिंग व टेक-ऑफ): एक स्पेसक्राफ्ट कॉम्बिनेशन लैंडर (Lander) और 'मार्स एसेंट व्हीकल' (Mars Ascent Vehicle) को मंगल की सतह पर उतारेगा।
दूसरा हिस्सा (ऑर्बिट व वापसी): दूसरा स्पेसक्राफ्ट ऑर्बिटर (Orbiter) और 'अर्थ-रिटर्न व्हीकल' को मंगल की कक्षा में तैनात रखेगा।
दोनों हिस्से स्वतंत्र रूप से मंगल ग्रह की यात्रा करेंगे और सैंपल जुटाने के बाद अंतरिक्ष में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह मिशन?
मंगल ग्रह की सतह पर पहुँचने के बाद तियानवेन-3 ऊपरी मिट्टी के साथ-साथ गहराई में ड्रिल करके भी सैंपल एकत्र करेगा।
लैब एनालिसिस: किसी रोवर की तुलना में पृथ्वी पर मौजूद आधुनिक प्रयोगशालाओं में इन सैंपलों की कहीं बेहतर जाँच की जा सकेगी।
जीवन की खोज: इससे वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह के भूगर्भीय इतिहास को समझने और यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या वहाँ कभी जीवन पनपने योग्य परिस्थितियाँ मौजूद थीं।
सुरक्षा और बायो-प्रोटेक्शन का सख्त पहरा
मंगल ग्रह से किसी भी सामग्री को पृथ्वी पर लाने में सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण का जोखिम है।
दोहरा बचाव: इससे पृथ्वी के सूक्ष्मजीवों से मंगल के सैंपलों को दूषित होने से बचाया जाएगा।
पर्यावरणीय सुरक्षा: साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंगल ग्रह की मिट्टी से पृथ्वी के पर्यावरण या जीवों को कोई जैविक खतरा न हो।
अंतरिक्ष इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक
तियानवेन-3 अगर सफल रहता है, तो यह मानव इतिहास के सबसे जटिल रोबोटिक मिशनों में गिना जाएगा। इसमें मंगल पर सुरक्षित लैंडिंग, सैंपल कलेक्शन, मंगल की सतह से वापस रॉकेट लॉन्च करना, मंगल की कक्षा में स्पेसक्राफ्ट का जुड़ना (Rendezvous), और फिर पृथ्वी पर सफल लैंडिंग शामिल है।
यदि यह मिशन सफल होता है, तो चीन लाल ग्रह से सैंपल वापस लाने वाला दुनिया का पहला देश बन सकता है।

