XRBIA–L&T प्रकरण: ₹400 करोड़ के फंड डायवर्जन और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच के लिए MahaRERA में शिकायत दर्ज
मुंबई/पुणे: XRBIA Vangani परियोजना के पीड़ित घर खरीदारों (Homebuyers) ने लगभग ₹400 करोड़ के कस्टमर कलेक्शंस और कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच की माँग को लेकर Maharashtra Real Estate Regulatory Authority (MahaRERA) का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता के माध्यम से MahaRERA के Chairperson, Secretary और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को एक विस्तृत, साक्ष्य-आधारित शिकायत भेजी गई है।
यह मामला केवल व्यक्तिगत home loan या EMI विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि चार बड़ी परियोजनाओं—XRBIA Vangani Phase-1, Phase-2, Phase-3 और Phase-4—की वित्तीय गवर्नेंस, फंड के बहाव (Fund Flow) और नियामकीय निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
Form-5 और RERA रिकॉर्ड्स से बड़े खुलासे
शिकायतकर्ताओं द्वारा RERA Form-5 (2017 से 2023) के विश्लेषण में पाया गया कि चारों फेज मिलाकर ग्राहकों से ₹400 करोड़ से अधिक की वसूली की गई और ₹200 करोड़ से अधिक निकाले गए। इसके बावजूद धरातल पर निर्माण कार्य बेहद अधूरा है:
Phase-1: ~69.87% पूर्ण
Phase-2: ~13.20% पूर्ण
Phase-3: ~51.75% पूर्ण
Phase-4: ~14.59% पूर्ण
चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के Form-5 रिमार्क्स में कई वित्तीय रेड फ्लैग्स सामने आए हैं, जिनमें गलत खाते में रकम जमा होना, शॉर्ट डिपॉजिट्स, अंतर-फेज फंड ट्रांसफर (Inter-phase transfer) और फंड डायवर्जन की संभावना जताई गई है।
L&T Finance की भूमिका और एग्रीमेंट में विरोधाभास
संलग्न Registered Agreement for Sale से पता चलता है कि परियोजना की जमीन और इमारत L&T Finance/L&T Housing Finance के पास मॉर्गेज थीं। खरीदारों का पैसा HDFC बैंक में संचालित “XRBIA Developers Ltd L&T Escrow-4” जैसे नामित एस्कॉर्ट खातों में जमा होना था।
हाल ही में (21 जनवरी 2026) L&T Finance के Grievance Redressal Desk ने दावा किया था कि उनकी भूमिका केवल होम लोन फाइनेंसिंग तक सीमित है। इस पर पीड़ितों ने सवाल उठाया है कि यदि भूमिका केवल फाइनेंसिंग तक सीमित थी, तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट में दर्ज मॉर्गेज, मैंडेटरी NOC और L&T-नामित Escrow अकाउंट की शर्तों का स्पष्टीकरण कौन देगा? इसी क्रम में L&T प्रबंधन को 100 प्रश्नों का लीगल नोटिस भेजा गया है।
केंद्रीय एजेंसियों और MahaRERA के पत्राचार
शिकायत के अनुसार, पूर्व में भी यह मामला विभिन्न केंद्रीय निकायों तक पहुँचा था:
MoHUA (मई 2026): आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने ₹400 करोड़ के फंड दुरुपयोग की जाँच हेतु MahaRERA को पत्र भेजा था।
SEBI (1 जून 2026): भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने L&T Group और Xrbia के खिलाफ शिकायतों को MahaRERA के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित किया।
CBI (EO-I): सीबीआई के आर्थिक अपराध प्रभाग ने Vistra ITCL (India) Ltd. एवं अन्य के खिलाफ प्राप्त 33 मूल शिकायतों को महाराष्ट्र पुलिस महानिदेशक (DGP) को अग्रसारित किया था।
वहीं, RTI से मिली जानकारी के अनुसार MahaRERA ने कुछ शिकायतों पर IBC मोराटोरियम (7 जनवरी 2024 से CIRP लागू होने) का हवाला दिया है, जिस पर पीड़ितों ने पूर्व की अवधि (2017-2023) में की गई नियामकीय कार्रवाई की फाइलों और ऑर्डर्स का ब्योरा माँगा है।
पीड़ित खरीदारों और अधिवक्ता की प्रमुख माँगें
पीड़ितों की ओर से कानूनी प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक लोन रिकवरी का मामला नहीं है, बल्कि प्रोजेक्ट-लेवल वित्तीय गवर्नेंस की जाँच का विषय है।
| क्र.सं. | प्रमुख माँग |
| 1 | सभी 4 प्रोजेक्ट फेजों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष Forensic Audit कराया जाए। |
| 2 | ₹400 करोड़ के फंड का पूरा Trail निकाला जाए और Escrow खाते के संचालन की जाँच हो। |
| 3 | L&T, XRBIA, Vistra ITCL और अन्य संस्थाओं की वास्तविक भूमिका तय की जाए। |
| 4 | भविष्य की कानूनी जाँच के लिए सभी भौतिक, डिजिटल और क्लाउड रिकॉर्ड्स तत्काल सुरक्षित किए जाएँ। |
| 5 | संज्ञेय अपराध पाए जाने पर मामले को Economic Offences Wing (EOW) या स्वतंत्र जाँच एजेंसी को सौंपा जाए। |
अधिवक्ता का वक्तव्य:
"यह borrower और lender का साधारण विवाद नहीं है। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट्स, RTI जवाब और सरकारी पत्राचार दर्शाते हैं कि यहाँ प्रोजेक्ट-लेवल गवर्नेंस की विस्तृत जाँच आवश्यक है। यदि संबंधित संस्थाएँ समयबद्ध कार्रवाई नहीं करती हैं, तो पीड़ित अन्य कानूनी एवं न्यायिक विकल्पों को अपनाने के लिए बाध्य होंगे।"

