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AI की रेस में भारत की नई छलांग: अब रोबोट्स को 'काम' सिखा रहे हैं भारतीय इंसान

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AI की रेस में भारत की नई छलांग: अब रोबोट्स को 'काम' सिखा रहे हैं भारतीय इंसान

नई दिल्ली: जब बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक रोबोटिक्स की आती है, तो अमेरिका और चीन को रेस में सबसे आगे माना जाता है। भारत को अब तक इस वैश्विक दौड़ में थोड़ा पीछे (Laggard) देखा जा रहा था, लेकिन अब भारत ने इस गेम में एंट्री मारने का एक अनोखा और बेहद जरूरी रास्ता ढूंढ निकाला है।

भारत अपनी विशाल वर्कफोर्स (दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कामगार आबादी) और कम लागत (Low labor cost) का फायदा उठाकर दुनिया भर के रोबोट्स को 'ट्रेन' करने का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।

Meet the humans teaching robots to perform routine tasks, as India finds a way to enter the AI race


रोज़मर्रा के काम और वीडियो से ट्रेनिंग

रोबोट्स को इंसानों की तरह कुशलता से काम करने (Dexterity) के लिए करोड़ों घंटों के वीडियो डेटा की ज़रूरत होती है। भारत में पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी कंपनियां खड़ी हो गई हैं, जो आम लोगों को अपने रोज़मर्रा के काम रिकॉर्ड करने के लिए पैसे दे रही हैं।

  • घर के काम से कमाई: आंध्र प्रदेश की रहने वाली और एक प्राइवेट स्कूल की टीचर तनीषा रेड्डी, स्कूल के बाद 'रोबोट ट्रेनर' के रूप में काम करती हैं। वे रोज़ सुबह-शाम खाना बनाने, बर्तन धोने और लंच पैक करने जैसे कामों के वीडियो रिकॉर्ड करती हैं। रोज़ 3-4 घंटे के वीडियो बनाने के बदले उन्हें हर घंटे के हिसाब से लगभग $4 (करीब 330 रुपये) से कम मिलते हैं। तनीषा कहती हैं, "मैं बहुत खुश हूँ, यह काम आसान है और इसके लिए मुझे अपने बच्चों से दूर भी नहीं जाना पड़ता।"

अमेरिका और चीन से मिल रहे हैं बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स

तनीषा जिस कंपनी के लिए काम करती हैं, उसका नाम है 'क़नात कंसल्टिंग सर्विसेज' (Qanat Consulting Services)। इसकी फाउंडर तस्लीम पत्तान ने बताया:

"हमें ज़्यादातर कॉन्ट्रैक्ट्स अमेरिका और चीन की कंपनियों से मिलते हैं। रोबोट्स लैब में बनते ज़रूर हैं, लेकिन उन्हें असली दुनिया में काम करने के लिए ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है। हाल ही में हमें एक गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के वर्कर्स के वीडियो सोर्स करने का भी कॉन्ट्रैक्ट मिला है।"

मार्केट का अनुमान: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज का मानना है कि अगले 10 सालों में ह्यूमनॉइड रोबोट (इंसानों जैसे रोबोट) का मार्केट $200 बिलियन का हो जाएगा। वहीं मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2050 तक यह $5 ट्रिलियन को पार कर जाएगा और दुनिया में 1 बिलियन रोबोट होंगे।

भारत की बड़ी कंपनियों की नई रणनीति

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सिर्फ वीडियो डेटा कलेक्ट करने के दाम आधे रह गए हैं। इसलिए भारतीय स्टार्टअप्स अब सिर्फ 'डेटा कलेक्ट' नहीं कर रहे, बल्कि खुद का डेटाबेस बना रहे हैं।

  • नियोकैम्ब्रियन एआई (Neocambrian AI): नोएडा के इस स्टार्टअप ने एक 'रोबोटिक्स डेटा फैक्टरी' शुरू की है। इसके फाउंडर अभिनव कुकरेजा ने 100 से अधिक फैक्ट्रियों का एक नेटवर्क बनाया है जहाँ वर्कर्स के काम को रिकॉर्ड किया जाता है। वे ऐसा डेटा बना रहे हैं जिससे रोबोट यह सीख सकें कि किसी चीज़ को कितनी ताकत से पकड़ना है (जैसे- अंडा पकड़ने और पानी की बोतल पकड़ने के बीच का अंतर)। कुकरेजा कहते हैं, "एआई की पूरी चेन में यही एक लेयर है जहाँ भारत न सिर्फ हिस्सा ले सकता है, बल्कि जीत सकता है।"

  • ह्यूमन लैब्स (Humyn Labs): यह स्टार्टअप भारत के अलावा लैटिन अमेरिका और एशिया से डेटा कलेक्ट कर रहा है। इसके को-फाउंडर मनीष अग्रवाल का कहना है कि भारत को इस रेस में बने रहने के लिए सिर्फ 'डेटा कलेक्टर' से बदलकर 'डेटा कनवर्टर' (डेटा को प्रोसेस करने वाला) बनना होगा।

रोबोटिक्स का अगला 'IT हब' बनेगा भारत?

विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे स्मार्टफोन में हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) होता है, वैसे ही रोबोट्स में भी होता है। भारत भले ही रोबोट्स के हार्डवेयर बनाने में पीछे हो, लेकिन उनके दिमाग (ऑपरेटिंग सिस्टम) और ट्रेनिंग डेटा के मामले में भारत दुनिया का "ह्यूमन लेबर मार्केटप्लेस" बन सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कभी भारत इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर का हब बना था।

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