तिहाड़ जेल में रची साजिश, सहारनपुर में फैक्ट्री: ₹20 के नकली सिक्कों के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश
सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्कों के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक अवैध फैक्ट्री को सील किया है। इस कार्रवाई के बाद जो खुलासे हुए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। तिहाड़ जेल से शुरू हुआ यह काला कारोबार पश्चिमी यूपी से लेकर पंजाब और बिहार तक फैल चुका था।
₹5-6 की लागत और सीधे एजेंटों को सप्लाई जांच में सामने आया कि गिरोह को ₹20 का एक नकली सिक्का तैयार करने में महज ₹5 से ₹6 का खर्च आता था। इसके बाद इन सिक्कों को एजेंटों के जरिए ₹12 से ₹15 के दाम में बाजार में खपाने के लिए बेचा जाता था। एजेंट इन सिक्कों को शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे-बड़े किराना स्टोर्स पर आसानी से चला देते थे, जहां अक्सर सिक्कों की बारीकी से जांच नहीं होती।
रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाने का नेटवर्क पुलिस के अनुसार, सहारनपुर की इस फैक्ट्री में छह अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई थीं। गिरोह का इरादा रोजाना 10,000 से 12,000 नकली सिक्के तैयार करने का था। इस पूरे सिंडिकेट को चलाने में करीब आठ मुख्य लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।
तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बनी योजना इस पूरे खेल की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में पड़ी थी। मामले का मुख्य आरोपी उपकार लूथरा और सहारनपुर का हिमांशु उर्फ गुल्लू जेल में एक-दूसरे से मिले थे। जेल से छूटने के बाद दोनों ने मिलकर सिक्के ढालने की फैक्ट्री शुरू की और धीरे-धीरे अपने नेटवर्क को कई राज्यों तक फैला लिया।
कई राज्यों तक फैले तार, बड़े खुलासे की उम्मीद पुलिस ने मौके से सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनसे अंतरराज्यीय नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं। पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में फैले इनके एजेंटों और अन्य साथियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

