जानिए बांसवाड़ा के 'Pipliya Ganesh' मंदिर की अनोखी परंपरा, जहां फर्श पर हैं महादेव

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‘लोढ़ी काशी’ बांसवाड़ा में स्थित है दुनिया का यह अनूठा गणेश मंदिर, जानें क्यों है बेहद खास

बांसवाड़ा (राजस्थान) : अपनी समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण 'लोढ़ी काशी' के नाम से मशहूर राजस्थान के बांसवाड़ा शहर में एक ऐसा चमत्कारी और अद्भुत गणेश मंदिर स्थित है, जो दुनिया भर में अपनी अनूठी वास्तुकला और धार्मिक रहस्य के लिए जाना जाता है।

क्या आपने देखा है ऐसा मंदिर? जहां माता-पिता से भी ऊपर विराजमान हैं प्रथम पूज्य गणेश

शहर के हृदय स्थल पिपली चौक स्थित ऐतिहासिक श्री रघुनाथजी मंदिर परिसर में 'पिपलिया गणेश' का यह धाम स्थापित है। सदियों पुराने पीपल के पेड़ के नीचे स्थित होने के कारण इन्हें पिपलिया गणेश कहा गया। यद्यपि कालक्रम में वह पीपल का वृक्ष अब नहीं रहा, लेकिन श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र यह छोटा सा मंदिर आज भी पूरी भव्यता के साथ विद्यमान है।

क्यों अनूठा है यह शिव-परिवार?

आमतौर पर मंदिरों में भगवान शिव या माता पार्वती को मुख्य स्थान दिया जाता है, लेकिन पिपलिया गणेश मंदिर में शिव-पार्वती परिवार का एक अत्यंत दुलर्भ दिग्दर्शन देखने को मिलता है:

  • पुत्र गणेश सर्वोच्च स्थान पर: प्रथम पूज्य गणपतिजी को ऊंचे अधिष्ठान (सिंहासन) पर मुख्य देवता के रूप में विराजमान किया गया है।

  • माता पार्वती आलिये में: मुख्य अधिष्ठान के ठीक नीचे बने आले (ताक) में देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित है।

  • पिता शिवलिंग फर्श पर: गर्भगृह के फर्श पर जलाधारीयुक्त छोटा सा शिवलिंग स्थापित है।

  • नंदी बाहर स्थापित: शिवलिंग की ठीक सीध में गर्भगृह से बाहर नंदी महाराज विराजित हैं।

रहस्य और अनुसंधान का विषय

धर्मशास्त्रों और मंदिर वास्तुशास्त्र के सामान्य नियमों से हटकर, माता-पिता (शिव-पार्वती) के मुकाबले पुत्र (गणेश) को सर्वोपरि स्थान देने के पीछे क्या धार्मिक या तांत्रिक रहस्य है, यह आज भी शोध का विषय है।

प्राच्य विद्याओं, ज्योतिष और तंत्र-मंत्र के केंद्र रहे बांसवाड़ा के विद्वानों और तत्कालीन मंदिर निर्माताओं ने किस विशेष परंपरा के तहत भगवान गणेश को प्रधान देवता का स्थान दिया, यह रहस्य शोधकर्ताओं को आकर्षित करता है। माता-पिता से भी अधिक पुत्र की प्रतिष्ठा का कीर्तिगान करता यह मंदिर संभवतः दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर है।

सुबह भोर की पहली किरण से लेकर देर रात तक यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विश्व भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला यह 'पिपलिया गणेश' मंदिर न केवल बांसवाड़ा वासियों को गर्व की अनुभूति कराता है, बल्कि लोढ़ी काशी की गौरवशाली विद्वता और आस्था का अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

विशेष इनपुट: डॉ. दीपक आचार्य

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