संत पॉल स्कूल वैन हादसे में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: लापरवाही से एक छात्र की मौत और कई घायल, फरार चालक की तलाश तेज
बांसवाड़ा/राजस्थान।। शहर में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। संत पॉल स्कूल के विद्यार्थियों को ले जा रही एक वैन भीषण दुर्घटना की शिकार हो गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक हादसे में एक छात्र की दुखद मौत हो गई, जबकि 8 बच्चे घायल हो गए हैं। घायलों में से एक गंभीर छात्र को उच्च उपचार के लिए रेफर किया गया है।
प्रशासनिक अमला अस्पताल पहुंचा, कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
दुर्घटना की सूचना मिलते ही बांसवाड़ा जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक (SP), एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। इसके बाद अधिकारियों ने महात्मा गांधी जिला अस्पताल पहुंचकर घायल बच्चों का हाल-चाल जाना और उनके परिजनों से मुलाकात की।
जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह ने डॉक्टरों को घायल बच्चों के समुचित और बेहतर इलाज के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों व लापरवाहों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के बाद चालक फरार, पुलिस की कई टीमें गठित
दुर्घटना के तुरंत बाद वैन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चालक की धरपकड़ के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं। पुलिस हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है और दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटी है।
क्षेत्र में शोक और भारी आक्रोश, यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे बांसवाड़ा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं स्थानीय निवासियों और परिजनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। घटना ने जिले में निजी स्कूलों के परिवहन साधनों और शहर की यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
सुबह के समय निजी स्कूलों की जल्दबाजी और समय सीमा के दबाव के कारण स्कूल वाहन तेज गति और अंधाधुंध तरीके से चलाए जाते हैं।
शहर के व्यस्ततम रास्तों पर भारी वाहनों की बेरोक-टोक आवाजाही और बायपास व ओवरब्रिज जैसी बुनियादी यातायात व्यवस्थाओं की कमी से आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है।
नागरिकों ने मांग की है कि निजी स्कूलों की मनमानी और स्कूल वाहनों की गति पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।


