कुशलगढ़ के सपूत ने बढ़ाया देश-प्रदेश का मान: जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में जूरी मेंबर बने दीपक जोशी
कुशलगढ़ (बांसवाड़ा) : राजस्थान के बांसवाड़ा जिले स्थित कुशलगढ़ कस्बे के लिए बेहद गर्व और हर्ष का ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। यहाँ के स्थानीय निवासी दीपक महेश जोशी (पिंटू) का चयन जापान के नागोया शहर में आयोजित हो रहे 20वें एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया 2026) में बतौर जूरी मेंबर हुआ है। वह इस बहुराष्ट्रीय खेल महाकुंभ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस उपलब्धि की खबर मिलते ही पूरे वागड़ अंचल और राजस्थान में खुशी की लहर दौड़ गई है।
खेल निष्पक्षता की संभालेंगे बड़ी कमान
एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर जूरी मेंबर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमबद्ध खेल संचालन की पूरी जिम्मेदारी जूरी पर ही टिकी होती है। दीपक जोशी का इस प्रतिष्ठित पद पर चुना जाना उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत, खेल के प्रति अटूट समर्पण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
छोटे से कस्बे से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
परिवार और मित्रों के बीच 'पिंटू' नाम से लोकप्रिय दीपक जोशी अपने सरल एवं मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। बचपन से ही खेलों के प्रति जुनून रखने वाले दीपक ने अपनी लगन को ही जीवन का लक्ष्य बनाया। एक छोटे से आदिवासी बाहुल्य अंचल से निकलकर विश्वस्तरीय आयोजन तक पहुँचने का उनका यह सफर आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
45 देशों के महाकुंभ में भारत की धमक
गौरतलब है कि 20वें एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची प्रांत और नागोया शहर में किया जा रहा है। पालोमा मिजुहो स्टेडियम में जापान के सम्राट नारुहितो द्वारा इसका भव्य शुभारंभ किया गया। इस महाकुंभ में 45 देशों के लगभग 11,000 खिलाड़ी 43 खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। भारत की ओर से 496 सदस्यीय दल हिस्सा ले रहा है, जिसकी अगुवाई ध्वजवाहक के रूप में स्टार शूटर मनु भाकर और कबड्डी कप्तान पवन सहरावत ने की।
क्षेत्र में जश्न का माहौल, सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की बाढ़
दीपक जोशी के चयन की सूचना मिलते ही नगरवासियों, जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और युवाओं ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दीपक ने न केवल अपने परिवार, बल्कि कुशलगढ़, बांसवाड़ा और पूरे राजस्थान का नाम वैश्विक पटल पर रोशन किया है। उनकी यह सफलता वागड़ अंचल के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।

