Ward 14 में टाई हुआ चुनाव, किस्मत की पर्ची ने बचाई ब्लॉक अध्यक्ष की लाज।

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कुशलगढ़ नगर पालिका चुनाव: ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष को साधारण कार्यकर्ता ने दी कड़ी टक्कर, बराबरी पर थमा मुकाबला; पर्ची से हुआ फैसला

कुशलगढ़ (बांसवाड़ा)। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि इसमें पद, पैसे या कद से ऊपर जनता का फैसला होता है। इसका सबसे रोमांचक उदाहरण कुशलगढ़ नगर पालिका चुनाव के वार्ड नंबर 14 में देखने को मिला। यहाँ का मुकाबला पूरे बांसवाड़ा जिले में सबसे ज़्यादा चर्चित और यादगार बन गया है, जहाँ एक ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष और एक साधारण कार्यकर्ता के बीच मुकाबला बराबरी (टाई) पर थमा और अंततः लॉटरी (पर्ची) से जीत-हार का फैसला हुआ।

कुशलगढ़ का सबसे रोमांचक मुकाबला! ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष और साधारण कार्यकर्ता के वोट हुए बराबर, पर्ची से खुला जीत का ताला।

कद्दावर नेता बनाम जमीन से जुड़ा कार्यकर्ता वार्ड 14 से मैदान में थे ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या, जो क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा चेहरा, आर्थिक रूप से मजबूत और संगठन में पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं। चुनाव से पहले राजनीतिक पंडित इस सीट को कांग्रेस की झोली में तय मान रहे थे।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी से मैदान में थे कलीमुद्दीन बोहरा। बिना किसी बड़े लश्कर, शोर-शराबे या बड़े बजट के कलीमुद्दीन ने सादगी और घर-घर जाकर जनसंपर्क की रणनीति अपनाई। उन्होंने हर गली-मोहल्ले में जाकर बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं से सीधा संवाद साधा।

3 बार रिकाउंटिंग, फिर भी टाई मतगणना के दिन जैसे-जैसे ईवीएम खुली, मुकाबला बेहद रोमांचक होता गया। अंतिम राउंड तक दोनों प्रत्याशियों को बिल्कुल बराबर-बराबर मत मिले। माहौल में तनाव बढ़ता देख निर्वाचन अधिकारियों ने पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में दो बार दोबारा गिनती (रिकाउंटिंग) करवाई। तीनों बार परिणाम बिल्कुल समान रहा, जिससे मतगणना हॉल में सन्नाटा छा गया।

बच्चे द्वारा निकाली गई पर्ची ने तय किया फैसला निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार मुकाबला टाई होने पर लॉटरी (पर्ची) निकालने का प्रावधान है। अधिकारियों ने दोनों प्रत्याशियों के नाम की समान पर्चियाँ बनाकर एक बॉक्स में डालीं। इसके बाद एक छोटे बच्चे को बुलाकर पर्ची निकलवाई गई। पर्ची में रजनीकांत खाब्या का नाम निकला और उन्हें विधिवत विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र सौंप दिया गया।

Rajnikant Khabya Kushalgarh

जीत से ज़्यादा चर्चा 'नैतिक जीत' की भले ही कागजों में जीत रजनीकांत खाब्या की हुई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुकाबले को कलीमुद्दीन बोहरा की बड़ी नैतिक जीत माना जा रहा है। एक साधारण कार्यकर्ता द्वारा इतने कद्दावर नेता को बराबरी पर रोक देने की घटना ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है, वहीं कांग्रेस खेमे को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया है।

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